आतंकवाद का जन्म
एक आतंकवाद का जन्म...... अवाम में बेकारी, काम धंधा बन्द,युवाओं में बेरोजगारी, और बढ़ती हुई महँगाई मज़बूर करती है भूख को खंज़र उठाने पर, लूट-पाट ,चोरी .....पेट तो भरना ही है माना बाजार युग है, विभिन्न प्रकार के लाखों उत्पाद कम्पनियां बनाती है लेकिन उत्पाद के दाम कभी कभी आवश्यकता से अधिक लिखे जाते हैं... आखिर क्यों? सबसे ज्यादा मेडीसन(दवा)उत्पाद पर यह गोरख धंधा होता है जो बीमार इंसान की ज़िंदगी की ज़रूरत है उत्पाद लागत पर लाभ % प्रत्येक उत्पाद का निर्धारित होना चाहिए, लाभ भी मिले उत्पादनकर्ता को, इससे फ़्रॉड उत्पादन पर रोक लगेगी जीवका की बेसिक ज़रूरतों के उत्पादन पर खुद सरकार ध्यान न देकर ,प्राइवेट सेक्टर को सब सौंप रही है, पब्लिक सेक्टर में सुधार की और अनुशासन की ज़रूरत थी, न कि निजीकरण हाँथों में देने की निजी हाँथों में देकर, सरकार कहेगी क्या करें, पेट्रोल ,गैस ,अनाज,रोजगार, बिजली ,ट्रांसपोर्ट इत्यादि। नहीं लगभग सब मेरे हाँथों में नहीं है..... और क्या होगा भविष्य में गरीब आदमी नक्सली, बनने पर मजबूर होगा