इंकलाबी नज़्म #वैभव बेख़बर

 काम  दो  ठौ  करो, दस  बताते  रहो

और राशन  मुफ़त का  खिलाते  रहो

आदमी,   आदमी   से    लड़ाते   रहो

तख़्त  पाते  रहो,  तख़्त   खाते  रहो

धर्म के  नाम पर  , धर्म  के   नाम पर


मन्ज़िले  बेच  दो, हर सफ़र  बेच  दो

पूंजीपतियों  को  सारे  डगर  बेच  दो

जो  बग़ावत  करे , वो  नज़र बेच  दो

सारी  शर्मो-हया , हर   हुनर  बेच  दो

धर्म  के  नाम पर , धर्म  के   नाम पर


हाँथ  सीने  पे  रखकर, बख़ूबी   कहो

मिट  गई  मुल्क़  से अब  ग़रीबी कहो

सच  अगर  कोई  बोले, फ़रेबी   कहो

बढ़ती  महँगाई को  ही  तरक़्क़ी कहो

धर्म  के  नाम  पर ,  धर्म  के  नाम पर


भाई  भाई   को  दुशमन  बना दीजिए

आपसी  भाई - चारा   मिटा    दीजिए

मज़हबी   पाठ  सबको  पढ़ा   दीजिए

आग नफ़रत  की दिल में लगा दीजिए

धर्म  के  नाम  पर,  धर्म  के  नाम  पर !

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