इतिहास
अदम गोंडवी की एक ग़ज़ल के साथ....
हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये
अपनी कुर्सी के लिए जज़्बात को मत छेड़िये
हममें कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है
दफ़्न है जो बात, अब उस बात को मत छेड़िये
ग़र ग़लतियाँ बाबर की थीं; जुम्मन का घर फिर क्यों जले
ऐसे नाज़ुक वक़्त में हालात को मत छेड़िये
हैं कहाँ हिटलर, हलाकू, ज़ार या चंगेज़ ख़ाँ
मिट गये सब, क़ौम की औक़ात को मत छेड़िये
छेड़िये इक जंग, मिल-जुल कर ग़रीबी के ख़िलाफ़
दोस्त, मेरे मज़हबी नग़्मात को मत छेड़िये!
1
राजा भारमल (आमेर के शासक) ने सबसे पहले अकबर से संधि की और अपनी पुत्री जोधा बाई (मरियम-उज़-ज़मानी) का विवाह अकबर से किया।
उनके पुत्र मान सिंह मुग़ल साम्राज्य के सबसे शक्तिशाली सेनापति बने और "नवरत्नों" में से एक माने गए।
यह गठबंधन बहुत लंबे समय तक कायम रहा और आमेर के राजपूत मुगलों के सबसे वफादार सहयोगी बन गए।
2. बूँदी और कोटा के हाड़ा राजपूत:
हाड़ा राजपूतों ने भी अकबर और जहाँगीर दोनों के अधीन रहकर कई युद्धों में भाग लिया।
बूँदी के राव सूरजन हाड़ा और उनके वंशजों ने मुगलों से अच्छी नजदीकी बनाए रखी।
3. जसवंत सिंह (मारवाड़ के राजा) औरंगज़ेब के दरबार में एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व थे।
4.बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने अंग्रेजों के लिए प्रथम विश्व युद्ध में सैनिक भेजे थे।
वे ब्रिटिश साम्राज्य के दरबारों में प्रतिनिधि बनकर गए और "Knight" की उपाधियाँ भी प्राप्त कीं।
5. बूँदी और कोटा के हाड़ा राजपूत:
इन्होंने 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों का साथ दिया, इसके बाद उन्हें अधिक अधिकार और जागीरें मिलीं
6....1857 में जब रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे विद्रोह कर रहे थे, रीवां रियासत ने अंग्रेजों को सैन्य सहयोग दिया।
7.टोडरमल (अकबर के नवरत्न, राजस्व मंत्री):
भले ही टोडरमल कायस्थ समुदाय से थे (कभी-कभी ब्राह्मण से जोड़ा जाता है), परंतु उन्होंने मुग़ल प्रशासन का मजबूत आर्थिक ढांचा तैयार किया।
8. . सिंधिया (ग्वालियर) अपनी रियासत को सुरक्षित रखने के लिये, अंग्रेजों को अपना समर्थन दिया
9. पण्डित बीरबल (महेशदास):ब्राह्मण कुल में जन्मे, अकबर के दरबार में नवरत्न बने।
मुस्लिम बादशाह की सेवा में रहते हुए धर्म, जाति आदि पर टिप्पणी न करना—कई राष्ट्रवादी आलोचकों के अनुसार अवसरवादी।
10. बीरभद्र तिवारी (1857 – अवध): चन्द्र शेखर आजाद,की मुखबिरी करके अंग्रेजों से ईनाम लिया। (स्थानीय परंपराओं में नाम आता है, पूर्ण ऐतिहासिक पुष्टि सीमित)
11. राजा महिप नारायण सिंह (बनारस):1857 के विद्रोह में चुप्पी और अंग्रेजों का परोक्ष समर्थन।
रियासत बचाई, आत्मा गिरवी रखी।
12. राजा अमर सिंह (जौनपुर):अंग्रेजों से गुप्त गठबंधन कर क्रांतिकारियों की जानकारी दी।
बदले में रियासत सुरक्षित रखी।
13. राघव चेतन (ब्राम्हण) राजा रत्नसेन के दरबार का एक तांत्रिक और ज्योतिषी था। कहा जाता है कि वह काले जादू (तंत्र विद्या) में लिप्त था। जब उसकी काली विद्या का भेद खुला, तो राजा रत्नसेन ने उसे चित्तौड़ से अपमानित करके निकाल दिया।
अपमानित होकर राघव चेतन ने बदला लेने के लिए दिल्ली जाकर अलाउद्दीन खिलजी को चित्तौड़ और पद्मावती की सुंदरता के बारे में बताया, जिससे खिलजी ने चित्तौड़ पर चढ़ाई की।
14. राणा सांगा पर तो वर्तमान में विवाद चल ही रहा है,
मेवाड़ के महाराणा प्रताप ने मुगलों से कभी संधि नहीं की और आज भी स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक माने जाते हैं।
सिखों का मुगलों से संघर्ष –
गुरु अर्जुन देव जी (5वें गुरु) ने सिख समुदाय को संगठित किया, जिससे भयभीत होकर मुगल सम्राट जहाँगीर ने उन्हें शहीद करवा दिया (1606)।
इसके बाद गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने मिरी-पीरी का सिद्धांत देते हुए सिखों को आत्मरक्षा के लिए हथियार उठाने की प्रेरणा दी।
गुरु तेग बहादुर जी (9वें गुरु) ने औरंगज़ेब द्वारा कश्मीरी पंडितों के जबरन धर्मांतरण के विरोध में बलिदान दिया (1675)।
फिर गुरु गोबिंद सिंह जी (10वें गुरु) ने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना कर सिखों को सैनिक रूप में संगठित किया। उनके चारों बेटे मुगलों के अत्याचारों में शहीद हुए, पर वे कभी झुके नहीं।
बंदा सिंह बहादुर ने गुरु गोबिंद सिंह जी की प्रेरणा से मुगलों के खिलाफ विद्रोह किया, ज़मींदारी प्रथा समाप्त की, और पंजाब में न्याय पर आधारित शासन शुरू किया। अंततः वे पकड़कर क्रूरतापूर्वक शहीद कर दिए गए।
18वीं शताब्दी में सिख मिसलों ने मुगलों की सत्ता को पूरी तरह उखाड़ दिया, और महाराजा रणजीत सिंह ने एक स्वतंत्र, शक्तिशाली सिख साम्राज्य की स्थापना की जो कभी मुगलों के अधीन नहीं रहा।
एक और विमर्श ….....
आइए आज भारत देश के सबसे बड़े गद्दारों के विषय में जानते हैं :-
1- सिक्ख गुरु गोविंद सिंह के साथ गद्दारी करने वाला
2-शिवा जी महाराज के साथ गद्दारी करने वाला
3- राजा रतन सिंह के साथ गद्दारी करने वाले
4- गुरु तेग बहादुर के साथ गद्दारी करने वाला
5- सम्राट पृथ्वीराज चौहान के साथ गद्दारी करने वाले
6- समस्त हिन्दुओं के साथ गद्दारी करने वाले
1- पंडित महेश दास दूबे ( पंडित बीरबल)- बीरबल मुगल सम्राट अकबर के प्रमुख वजीर थे,और अकबर के नौ रत्नों में सबसे प्रमुख थे ! अकबर द्वारा चलाए गये "दीन-ए-इलाही" धर्म को मात्र एक हिन्दू पंडित बीरबल ने ही स्वीकार किया था! बीरबल के ही सलाह पर अकबर हिंदू महिलाओं का 'मीना बाजार' लगवाता था ! अकबर द्वारा समस्त हिन्दू विरोधी कार्यों मे सबसे प्रमुख योगदान पंडित बीरबल का रहा क्योंकि वही अकबर के मुख्य सलाहकार थे !
2. तानसेन (रामतनु पाण्डेय):- अकबर के नवरत्नों में से एक तानसेन जो मुगलों के लिए संगीत गायन और ठुमके लगाते थे !
3. पंडित राघव चेतन- इसने अलाउद्दीन खिलजी से संबंध बनाकर हिंदू शासक राजा रतन सिंह के ऊपर हमला करवाए, जिसके फलस्वरूप सभी हिंदू योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए और सती माता पद्मावती के नेतृत्व में 16000 वीरांगनाओं ने जौहर किया !
4. पंडित गंगा दत्त (गंगू पंडित) - इस गद्दा'र के संदर्भ में जानकर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे ! गंगू पंडित, सिक्ख गुरु, गुरु गोविंद सिंह का रसोइया था ! जिसमें गुरु गोविंद सिंह के बेटे जोरावर सिंह (7 वर्ष) और फतेह सिंह (5 वर्ष) का पता मुगल वजीर खां को बताकर 'दिवाल' में चुनवा दिया था, और मुगलों से सोने का मुहर उपहार लिया था ।
5. 5. पंडित भास्कर कुलकर्णी - यह अफगान आक्रांता अफजल खान के वकील थे, और इन्होंने अफजल खान को खुश करने के लिए "शिवा जी महाराजा" पर धोखे से त'लवार से वार किया था !
6.पंडित माधो भट्ट- यह तंवर राजपूतों के राजदरबारी थे, यह लालच वश मोहम्मद गौरी के जाकर मिले और सम्राट पृथ्वीराज चौहान पर हमला करवाए .
7.पंडित जगन्नाथ- यह मुगल अकबर के बेटे जहांगीर के राजदरबारी थे और हिंदु विरोधी कृत्यों में सम्मिलित थे ।
8.पंडित चंद्रभान ब्राह्मण- यह मुगल जहांगीर के मुंशी थे, और मुगलों के महिमामंडल में "चार चमन" पुस्तक लिखा था !
9. पंडित रविराज शर्मा- इन्होंने तो श्रृष्टि में सबसे अलग कार्य किया है, इन्होंने अल्ला को ईश्वर का दूत लिखा, और मुगलों व अल्ला के गुणगान में नये ग्रंथ 'अल्लोपनिषद” अर्थात 'अल्ला का उपनिषद' ही लिख दिया !
इन्हीं वजहों से हिंदुओ कों मुसलमानों में कन्वर्ट किया गया था ।
10. पंडित चैतोदास- मुगलों से मिलकर सिक्खों के गुरु तेग बहादुर सिंह के साथ धोखा कर म'रवा दिया था ।
11. पंडित राजा दाहिर - जिसने मोहम्मद बिन कासिम को भारत पर आक्रमण के लिए बुलाया था ।
12. पंडित वीरभद्र तिवारी- 5000 रुपये कि लालच के लिए "चंद्रशेखर आजाद" का पता अंग्रेजों को बताकर चंद्रशेखर आजाद को म'रवा दिया
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